ग्रहों के दौर समझें
शादी कब होगी (Shadi Kab Hogi)? कुंडली में विवाह की दशा कैसे देखें
आखिरी अपडेट · Kundlit संपादकीय टीम
एक नज़र में
- मुख्य घर
- सातवाँ: साझेदारी
- समय
- संबंधित बड़े और छोटे दौर
- गुरु की जाँच
- सातवें स्वामी से पहली, पाँचवीं, नौवीं राशि
- टूल देता है
- ग्रह-दौरों की तारीखें
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गणना के लिए खाता नहीं चाहिए। जन्म की तारीख, सही समय और जगह भरें।
शास्त्र के अनुसार कौन सी दशा शादी लाती है?
शास्त्रीय समय-जाँच सातवें घर से जुड़े ग्रहों से शुरू होती है। सातवाँ घर साझेदारी का क्षेत्र है। फलदीपिका 10.13 तीन ग्रह बताती है। सातवें में बैठा, सातवें को देखने वाला और सातवें का स्वामी। शुक्र शादी का दूसरा कारक है। जातक पारिजात 14.26 एक ग्रह और जोड़ता है। दूसरे घर का स्वामी जिस राशि में बैठा है, उस राशि का स्वामी लें। उस ग्रह का दौर भी शादी दे सकता है।
उसी श्लोक में दसवें और आठवें स्वामी के दौर भी हैं। सातवें में उसके स्वामी के साथ बैठा ग्रह भी है। ज्योतिष रत्नाकर पृष्ठ 271–273 में समय के और नियम हैं। तारीखें देखने से पहले कुंडली के असली संबंध लिखें।
सभी की शादी के लिए एक ग्रह तय नहीं। किसी का सातवें का स्वामी मंगल है। दूसरे का बुध। उनकी सूची अलग होगी। शुक्र का दौर उम्मीदवार है, अपने आप शादी नहीं। महादशा पृष्ठभूमि देती है। अंतर्दशा दायरा घटाती है। सिर्फ अच्छा नाम ढूँढने के बजाय दोनों ग्रह पढ़ें।
आधार: जातक पारिजात, वैद्यनाथ, अध्याय 14, श्लोक 26; ज्योतिष रत्नाकर, पृष्ठ 271–274 (शादी का समय)
गुरु का अभी का चलना क्या भूमिका निभाता है?
गोचर यानी अभी ग्रह का आकाश में चलना। फलदीपिका 10.14 दशा को गुरु के गोचर से जोड़ती है। सातवें स्वामी की राशि या नवांश राशि का स्वामी लें, जो बली हो। शुक्र और चंद्र में जो बली हो, उसे भी लें। ऐसे ग्रह के दौर में शादी होती है। समय वह है जब गुरु सातवें स्वामी की राशि या नवांश से त्रिकोण में आए। त्रिकोण यानी वहाँ से पहली, पाँचवीं या नौवीं राशि।
सातवें का स्वामी मिथुन में हो तो मिथुन, तुला और कुंभ त्रिकोण हैं। मिथुन को एक गिनें। तुला पाँचवीं और कुंभ नौवीं है। यह सातवें घर से गुरु देखना नहीं है। नियम का आधार सातवें स्वामी की जगह है। घर और उसके ग्रह को मिलाने से सूची बदल जाएगी।
अकेला गुरु का प्रवेश अंतिम शादी-दौर नहीं है। पहले संबंधित दशा खोजें। फिर उसके अंदर गुरु का मेल देखें। टूल दशाएँ दिखाता है। पूरा गोचर-मेल नहीं करता। यह अतिरिक्त काम पूरी रीडिंग में होता है। गुरु का हर त्रिकोण-प्रवेश शादी कराता ही है, यह दावा न करें।
कुंडली में शादी देर से होने के क्या कारण हैं?
ज्योतिष रत्नाकर पृष्ठ 274 पाप असर को देर से जोड़ता है। वह लग्न, दूसरे, सातवें घर और शुक्र को जाँचता है। इन पर पाप असर शादी में देर करता है। शुभ असर शादी जल्दी लाता है। सातवें का स्वामी बली होकर केंद्र या त्रिकोण में हो तो शादी जल्दी होती है। ये कुंडली की शर्तें हैं, इंतजार कर रहे व्यक्ति पर फैसला नहीं।
फलदीपिका 10.15 देर की नहीं, जीवनसाथी की हानि की बात करती है। इसमें दो बातें साथ चाहिए। पहली, सातवें का स्वामी कमजोर हो। वह शत्रु या नीच राशि में हो, अस्त हो, या पाप ग्रह उसे देखें। दूसरी, सातवें घर में पाप ग्रह हों या उस पर दृष्टि डालें। इनमें से एक अकेली बात नियम पूरा नहीं करती।
देर और कभी न होना अलग दावे हैं। देर का नियम शादी कभी न होने में न बदलें। यह पेज शास्त्रीय नियमों से सूची बनाना समझाता है। बिना कुंडली पाठक को स्थायी लेबल नहीं देता। उम्र के डर के बजाय ग्रह की जगह और तारीख से काम करें।
आधार: ज्योतिष रत्नाकर, पृष्ठ 271–274 (शादी का समय); फलदीपिका, अध्याय 10, श्लोक 13–15
अपनी दशा में शादी के दौर कैसे जाँचें?
दर्ज जन्म विवरण से ऊपर की गणना करें। अभी का बड़ा ग्रह और अंत-तारीख लिखें। अभी की अंतर्दशा और प्रत्यंतर भी दिखते हैं। मुख्य समय-क्रम से अगला बड़ा दौर देखें। ये तारीखें सूची का आधार हैं। अपने आप अंतिम शादी-फैसला नहीं।
अब सातवें का स्वामी, शुक्र और सातवें में संबंधित ग्रह खोजें। दूसरे स्वामी की राशि का स्वामी भी देखें। उन ग्रहों के छोटे दौर चिन्हित करें। टूल अभी का छोटा दौर दिखाता है। अगले दस साल की पूरी अंतर्दशा-सूची खोलने की सुविधा नहीं देता। लंबाई की तालिकाएँ विभाजन समझाती हैं। पूरी रीडिंग आगे के सभी हिस्से देख सकती है।
अंत में गुरु के संबंधित गोचर मिलाएँ। नियम पूरा करने वाले मेल रखें। हर उम्मीदवार के साथ उसका ग्रह-संबंध लिखें। इससे सूची जाँची जा सकेगी। ग्रह-संबंध, तारीखों का हिसाब और गुरु की जाँच चाहिए। कोई हिस्सा छूटे तो तरीका अधूरा है।
क्या उपपद लग्न शादी का समय बताता है?
उपपद बारहवें घर का प्रतिबिंब है। पाराशर अध्याय 30 इसे शादी की स्थिति के लिए पढ़ता है। सातवें घर के साथ उपयोगी है। लेकिन अकेले पक्की तारीख की घड़ी नहीं। पहले सही गिनती और अपवाद लगाकर राशि निकालें। फिर उस पर ग्रहों का असर पढ़ें।
उपपद से दूसरा घर शादी की स्थिति की एक और जाँच है। इसका काम दौर की अंत-तारीख से अलग है। सिर्फ उपपद राशि लिखकर शादी का साल न घोषित करें। उपपद वाला पेज गिनती और हमारे कैलकुलेटर का स्वामी-नियम बताता है। समय के लिए जुड़े ग्रह और दशा-सूची फिर भी चाहिए।
आधार: बृहत् पाराशर होरा शास्त्र, अध्याय 30, श्लोक 1–10 (महर्षि संस्करण)
उपपद की गिनती समझेंक्या फ्री टूल शादी का बिल्कुल सही साल दे सकता है?
फ्री टूल ग्रह-दौरों की तारीखें देता है। शादी का पक्का साल नहीं। पूरी समय-रीडिंग कुंडली के संबंध और गुरु के मेल जाँचकर खिड़कियाँ क्रम में रखती है। रीडिंग समय-खिड़कियाँ बताती है, पक्की तारीखें नहीं। दौर की शुरू तारीख घटना उसी दिन होने का वादा नहीं।
फ्री नतीजे से अच्छा सवाल तैयार करें। दर्ज समय, ग्रह-दौरों की सूची और सातवें स्वामी की जगह लाएँ। पूछें कौन सी खिड़की नियम पूरा करती है। कौन सा दूसरा कारक उसे कमजोर करता है। खरीदी रीडिंग में पूरा मेल जुड़ना चाहिए। सिर्फ टूल के ग्रह-नाम दोहराना काफी नहीं।
मिसाल की कुंडली — किसी असली व्यक्ति की नहीं
तुला लग्न की मिसाल में किन ग्रहों के दौर देखें?
मिसाल आजमाने के लिए दिल्ली, 18 जनवरी 2000, रात 00:25 (भारतीय समय) डालें। यह किसी ग्राहक की कुंडली नहीं। कैलकुलेटर में तुला लग्न आता है। सातवाँ मेष है और उसका ग्रह मंगल कुंभ में है। गुरु और शनि सातवें में हैं। इसलिए मंगल, शुक्र और सातवें में बैठे ग्रहों के दौरों की सूची बनाएँ। पूरी श्लोक की अन्य शर्तें अलग जाँचें।
कुंभ में मंगल से गुरु के त्रिकोण कुंभ, मिथुन और तुला हैं। राहु–मंगल का दौर 16 अक्टूबर 2029 से 3 नवंबर 2030 तक है। रोज की गणना में मेल 16 अक्टूबर 2029–24 जनवरी 2030 मिलता है। दूसरा 1 मई–22 सितंबर 2030 है। बीच का अंतर गुरु के वापस चलने से है। ये तारीखें दिन तक सही हैं, घंटे तक नहीं।
गुरु–शनि 21 दिसंबर 2032 से 5 जुलाई 2035 है। दैनिक जाँच में गुरु का त्रिकोण मेल 18 मार्च 2033–27 मार्च 2034 है। शनि यहाँ सातवें में बैठा है। सिर्फ इतना मेल शादी का फैसला नहीं है। जातक पारिजात का साथ-बैठने वाला पूरा नियम और अन्य कुंडली शर्तें भी रखें। यह उदाहरण सूची बनाना दिखाता है, शादी की भविष्यवाणी नहीं।
तीन अलग तारीख-सूचियाँ बनाएँ। पहली मुख्य ग्रहों की है। दूसरी संबंधित छोटे ग्रहों की। तीसरी गुरु के मेल वाले दिनों की। केवल दूसरी और तीसरी में साझा समय आगे जाँचें। शुक्र का नाम आने से तारीख खुद न जोड़ें। इस दस साल की चुनी सूची में कोई शुक्र-अंतर्दशा न हो तो उसे गढ़ें नहीं। नियम से मिला उपलब्ध समय ही लिखें।
सही जन्म समय जरूरी है। समय-खिड़की शादी की तारीख की गारंटी नहीं है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या शुक्र की दशा में शादी तय है?
नहीं। शुक्र एक उम्मीदवार है। सातवें से जुड़े ग्रह और गुरु का संबंधित चलना भी जाँचना पड़ता है।
शादी का मुख्य घर कौन सा है?
सातवाँ घर साझेदारी का मुख्य क्षेत्र है। उसका स्वामी और वहाँ के ग्रह समय की सूची में काम आते हैं।
क्या सिर्फ गुरु का गोचर काफी है?
नहीं। फलदीपिका का नियम संबंधित दशा के साथ गुरु का त्रिकोण-गोचर रखता है।
क्या देरी का मतलब शादी नहीं होगी?
नहीं। देर और कभी न होना अलग दावे हैं। पूरी कुंडली के ग्रह और शुभ असर देखें।
क्या उपपद पक्की तारीख देता है?
अकेले नहीं। यह शादी की स्थिति का कारक है, अलग तारीख की घड़ी नहीं।
फ्री टूल क्या बताता है?
यह वर्तमान बड़े और छोटे दौर, उनकी अंत-तारीखें और मुख्य समय-क्रम देता है। पूरी शादी-जाँच नहीं करता।
स्रोत
पाराशर के अध्याय महर्षि संस्करण के अनुसार हैं। दूसरे संस्करणों में नंबर बदल सकते हैं।
- जातक पारिजात, वैद्यनाथ, अध्याय 14, श्लोक 26
- फलदीपिका, अध्याय 10, श्लोक 13–15
- ज्योतिष रत्नाकर, पृष्ठ 271–274 (शादी का समय)
- बृहत् पाराशर होरा शास्त्र, अध्याय 30, श्लोक 1–10 (महर्षि संस्करण)