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नवांश कुंडली कैलकुलेटर (D9)

नवांश (D9) कुंडली आपकी जन्म कुंडली की हर राशि को 3°20′ के नौ हिस्सों में बाँटकर हर ग्रह को फिर से रखती है। जन्म विवरण डालें और अपना नवांश लग्न, हर ग्रह की D1-से-D9 राशि उसके D9 राशि-स्वामी के साथ, और चिह्नित वर्गोत्तम ग्रह पाएँ।

समीक्षक Pt. Deep Narayan Mishra, Consulting Astrologer · अंतिम समीक्षा 15 जुलाई 2026 · हम इसकी गणना कैसे करते हैं

नवांश (D9) कुंडली जन्म कुंडली की हर राशि को 3°20′ के नौ बराबर हिस्सों में बाँटती है और हर ग्रह को नई राशि में फिर से रखती है। जन्म विवरण डालें: परिणाम में आपका नवांश लग्न और हर ग्रह की D1 से D9 राशि उसके D9 राशि-स्वामी के साथ मिलती है, और वर्गोत्तम ग्रह (D1 और D9 दोनों में एक ही राशि) अलग से चिह्नित होते हैं।

जन्म विवरण
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इसे कैसे इस्तेमाल करें

  1. जन्म विवरण भरें: तिथि, सटीक समय और जन्म स्थान — D9 लग्न समय को लेकर बहुत संवेदनशील है।
  2. गणना करें: हम D1 कुंडली बनाकर उसका नौवाँ वर्ग निकालते हैं (Swiss Ephemeris, लाहिरी अयनांश)।
  3. D9 चार्ट पढ़ें: आपका नवांश लग्न उसके स्वामी और अंश के साथ, और हर ग्रह की D1 राशि → D9 राशि, D9 राशि-स्वामी सहित।
  4. वर्गोत्तम ग्रह पहचानें: जो ग्रह D1 और D9 दोनों में एक ही राशि में हैं, वे चिह्नित होते हैं — परंपरा में इन्हें बलवान पढ़ा जाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नवांश कुंडली (D9 चार्ट) क्या है?

नवांश वैदिक ज्योतिष का नौवाँ विभाजन-चार्ट (वर्ग) है, जिसे D9 लिखते हैं। हर राशि 3°20′ के नौ बराबर हिस्सों में बँटती है, और हर ग्रह इस हिसाब से नई राशि में फिर से रखा जाता है कि वह किस नौवें हिस्से में है। नतीजा एक दूसरी कुंडली है, जो पूरी तरह आपकी जन्म कुंडली (D1) से निकलती है। 'नव' यानी नौ और 'अंश' यानी हिस्सा — नौवाँ हिस्सा।

नवांश कुंडली किस काम आती है — इसका क्या मतलब है?

परंपरा नवांश को जन्म कुंडली के बाद सबसे महत्वपूर्ण वर्ग मानती है। शास्त्रीय रूप से इसे विवाह और जीवनसाथी के लिए देखा जाता है, और हर ग्रह के भीतरी बल की दूसरी जाँच के रूप में भी: जो ग्रह जन्म कुंडली में कमज़ोर पर D9 में अच्छी स्थिति में हो, उसे छिपा सहारा मिला हुआ पढ़ा जाता है; जो D1 में बलवान पर D9 में पीड़ित हो, वह दिखने से कम भरोसेमंद माना जाता है। अभ्यासी D1 से बना कोई भी निष्कर्ष पक्का करने से पहले D9 ज़रूर देखते हैं।

नवांश कुंडली कैसे पढ़ें?

नवांश लग्न से शुरू करें — वही D9 लग्न जो यह कैलकुलेटर देता है — और उससे भाव वैसे ही गिनें जैसे जन्म कुंडली में। फिर हर ग्रह की D9 राशि की तुलना उसकी D1 राशि से करें: D9 राशि का स्वामी और उस स्वामी की अवस्था देखें, और वर्गोत्तम ग्रह (दोनों कुंडलियों में एक ही राशि) खोजें। मानक तरीक़ा हमेशा तुलनात्मक है — D1 और D9 साथ-साथ — D9 को अलग-थलग, स्वतंत्र कुंडली की तरह नहीं पढ़ा जाता।

वर्गोत्तम क्या है?

कोई ग्रह वर्गोत्तम ('वर्गों में उत्तम') तब होता है जब वह जन्म कुंडली (D1) और नवांश (D9) दोनों में एक ही राशि में हो। यह हर राशि के कुछ खास अंश-दायरों में होता है। परंपरा वर्गोत्तम ग्रह को बलवान पढ़ती है — राशि का संकेत दो बार पक्का हुआ। यह कैलकुलेटर आपकी कुंडली के सभी वर्गोत्तम ग्रह अपने-आप चिह्नित कर देता है।

पुष्कर नवांश क्या है?

पुष्कर (या पुष्करा) नवांश कुछ खास नवांश-खंड हैं जिन्हें परंपरा शुभ मानती है — कुछ राशियों के 'पोषक' हिस्से, जहाँ बैठे ग्रह सहारा देने वाले फल देते माने जाते हैं। शास्त्रीय सूचियाँ हर तत्व की राशियों को दो-दो पुष्कर नवांश देती हैं। यह मुहूर्त और कुंडली-विवेचन में काम आने वाली एक बारीकी है; पुष्कर नवांश में बैठा ग्रह — बाक़ी बातें अनुकूल हों तो — ज़्यादा अनुकूल पढ़ा जाता है।

नवांश लग्न के लिए सटीक जन्म समय क्यों ज़रूरी है?

जन्म लग्न करीब हर दो घंटे में एक पूरी राशि पार करता है, और उसके भीतर हर नवांश-खंड सिर्फ़ 3°20′ का है — इसलिए नवांश लग्न करीब हर 13 मिनट में बदल जाता है। जन्म समय कुछ ही मिनट इधर-उधर हो तो वह अगली राशि में जा सकता है। ग्रहों की D9 राशियाँ कहीं ज़्यादा स्थिर हैं, क्योंकि ग्रह बहुत धीरे चलते हैं; समय की सटीकता खास तौर पर D9 लग्न माँगता है। यह टूल सब कुछ Swiss Ephemeris से, लाहिरी अयनांश (निरयण) पर निकालता है।

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