आज का यमगण्ड काल — अशुभ समय
समीक्षक Pt. Deep Narayan Mishra, Consulting Astrologer · अंतिम समीक्षा 24 May 2026 · हम इसकी गणना कैसे करते हैं
यमगण्ड काल राहु काल और गुलिक काल के साथ शास्त्रीय तीन अशुभ दैनिक समयों में से एक है। यह सूर्योदय/सूर्यास्त और वार के साथ हर दिन बदलता है। सही समय निकालने के लिए अपना शहर और तारीख चुनें।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
यमगण्ड काल क्या है?
यमगण्ड काल एक शास्त्रीय अशुभ समय है जो उपग्रह यम के अधीन है — यम एक छाया ग्रह है जिसका संबंध यमराज से है, जो मृत्यु के देवता और सूर्य के पुत्र हैं। राहु काल की तरह, यह सूर्योदय से सूर्यास्त तक के दिन के समय को आठ हिस्सों में बाँटकर निकाला जाता है, और परंपरा से नए काम, समारोह और ज़रूरी उपक्रमों के लिए इसे टाला जाता है।
यमगण्ड काल की गणना कैसे होती है?
सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर हिस्सों में बाँटा जाता है। यमगण्ड हर वार के लिए एक तय हिस्से में आता है: रविवार पाँचवाँ, सोमवार चौथा, मंगलवार तीसरा, बुधवार दूसरा, गुरुवार पहला, शुक्रवार सातवाँ, शनिवार छठा। साल भर दिन की लंबाई बदलती है, इसलिए हर हिस्से के असली मिनट गर्मियों में बढ़ जाते हैं और सर्दियों में घट जाते हैं।
यमगण्ड काल राहु काल से कैसे अलग है?
दोनों शास्त्रीय अशुभ समय हैं जो एक ही आठ-हिस्सों वाले दिन के बँटवारे से निकलते हैं, लेकिन इन पर अलग-अलग उपग्रहों का राज है और हर वार के लिए ये अलग हिस्सों में आते हैं। राहु काल राहु का हिस्सा है; यमगण्ड यम का हिस्सा है। किसी भी वार को ये दोनों समय एक-दूसरे से मिलते नहीं हैं, हालाँकि दोनों ही बड़े नए काम शुरू करने से मना करते हैं।
यमगण्ड काल में कौन-कौन से काम टालने चाहिए?
शास्त्रीय मुहूर्त ग्रंथ नए उपक्रम शुरू करने, अनुबंध पर दस्तखत करने, शुभ काम से यात्रा शुरू करने, विवाह समारोह और बड़ी खरीदारी से बचने की सलाह देते हैं। पहले से चल रहे रोज़मर्रा के काम पर आम तौर पर असर नहीं पड़ता; पाबंदी ज़रूरी काम शुरू करने पर है।
क्या यमगण्ड काल रात में भी देखा जाता है?
मुख्य गणना सूर्योदय से सूर्यास्त तक के दिन के समय पर लागू होती है। कुछ परंपराएँ सूर्यास्त से सूर्योदय तक के समय पर भी वैसी ही आठ-हिस्सों वाली बँटवारी लगाकर रात का यमगण्ड निकालती हैं, लेकिन यह रात का यमगण्ड दिन वाले से कहीं कम माना जाता है।
यमगण्ड का समय शहरों में अलग क्यों होता है?
गणना स्थानीय सूर्योदय और सूर्यास्त पर निर्भर करती है, और दोनों अक्षांश और देशांतर के साथ बदलते हैं। एक ही राज्य के दो शहरों में यमगण्ड के समय में कई मिनट का फ़र्क हो सकता है, इसीलिए यह टूल किसी एक पंचांग शहर के बजाय आपके खास स्थान का इस्तेमाल करता है।
यमगण्ड काल में क्या उपाय किए जाते हैं?
परंपरा सूर्य और यम को प्रार्थना, दान या सूर्य को जल चढ़ाकर (सूर्य अर्घ्य) प्रसन्न करने की सलाह देती है। कुछ लोग नए कामों में थोड़ी रुक लेते हैं और यमगण्ड काल खत्म होने के बाद फिर से शुरू करते हैं, बजाय इसके कि कोई खास अनुष्ठान करें।
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