Kundlitkundlit
ENहिं

उपपद लग्न कैलकुलेटर (जैमिनी)

उपपद लग्न (UL) जैमिनी प्रणाली में बारहवें भाव का आरूढ़ है, जिसे शास्त्रीय रूप से विवाह और जीवनसाथी के लिए देखा जाता है। जन्म विवरण डालें और अपनी UL राशि और स्वामी, सभी 12 आरूढ़ पद, आठ चरकारक (आत्मकारक से दाराकारक) और कारकांश पाएँ — हर एक शास्त्रीय उद्धरण के साथ।

समीक्षक Pt. Deep Narayan Mishra, Consulting Astrologer · अंतिम समीक्षा 15 जुलाई 2026 · हम इसकी गणना कैसे करते हैं

उपपद लग्न (UL) जैमिनी प्रणाली में बारहवें भाव का आरूढ़ पद है, जिसे शास्त्रीय रूप से विवाह और जीवनसाथी के लिए देखा जाता है। जन्म विवरण डालें: परिणाम में आपकी UL राशि और उसका स्वामी, सभी 12 आरूढ़ पद (A1–A12), आठों चरकारक (आत्मकारक से दाराकारक तक) और आपका कारकांश मिलता है — हर कथन के साथ उसका शास्त्रीय उद्धरण।

जन्म विवरण
शेयर करेंWhatsAppTelegramXFacebook

इसे कैसे इस्तेमाल करें

  1. जन्म विवरण भरें: जन्म की तिथि, समय और स्थान — ऑटोकम्प्लीट निर्देशांक और समयक्षेत्र भर देता है।
  2. गणना करें: हम आपकी कुंडली की जैमिनी परत निकालते हैं (Swiss Ephemeris, लाहिरी अयनांश, पूर्ण-राशि गिनती)।
  3. उपपद पढ़ें: आपकी UL राशि और उसका स्वामी, साथ में सभी 12 भावों के आरूढ़ पद (A1–A12)।
  4. कारक और उद्धरण देखें: आठ चरकारक (AK से DK तक) और आपका कारकांश — हर कथन अपने शास्त्रीय स्रोत के साथ।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उपपद लग्न (UL) क्या है?

उपपद लग्न वैदिक ज्योतिष की जैमिनी प्रणाली का एक बिंदु है: बारहवें भाव का आरूढ़ पद, जिसे A12 लिखते हैं। शास्त्रीय स्रोत — जैमिनी सूत्र और बृहत् पाराशर होरा शास्त्र के जैमिनी अध्याय — विवाह और जीवनसाथी के लिए UL, उसके स्वामी और आस-पास की राशियों को देखते हैं। यह एक राशि है, ग्रह नहीं: यह कैलकुलेटर बताता है कि 12 राशियों में से आपका UL किसमें पड़ता है और उस राशि का स्वामी कौन-सा ग्रह है।

उपपद लग्न की गणना कैसे होती है?

बारहवें भाव पर लगाए गए मानक आरूढ़ नियम से: लग्न से बारहवीं राशि का स्वामी खोजें, गिनें कि वह बारहवें से कितनी राशियाँ आगे गया है, फिर उतनी ही दूरी स्वामी से आगे गिनें — जिस राशि पर पहुँचें, वही आरूढ़ है। शास्त्रीय अपवाद तब लगते हैं जब गिनती उसी राशि या उससे सातवीं में पड़े (तब पद 10 राशियाँ आगे खिसकाया जाता है)। यह टूल आपकी जन्म कुंडली से यह अपने-आप निकालता है — Swiss Ephemeris की स्थितियाँ, लाहिरी अयनांश और पूर्ण-राशि गिनती के साथ।

क्या उपपद लग्न और आरूढ़ लग्न एक ही हैं?

नहीं — ये एक ही नियम से बने दो अलग बिंदु हैं। आरूढ़ लग्न (AL, यानी A1) पहले भाव का आरूढ़ पद है और व्यक्ति की सांसारिक छवि के लिए पढ़ा जाता है; उपपद लग्न (UL, यानी A12) बारहवें भाव का आरूढ़ पद है और विवाह तथा जीवनसाथी के लिए। यह कैलकुलेटर दोनों दिखाता है, साथ में सभी बारह भावों के आरूढ़ पद (A1 से A12 तक)।

विवाह और जीवनसाथी के बारे में उपपद लग्न क्या बताता है?

शास्त्रीय जैमिनी पाठ में UL और उसका स्वामी विवाह और जीवनसाथी की परिस्थितियों का वर्णन करते हैं: ग्रंथ विवाह की प्रकृति के लिए UL की राशि और स्वामी को, और विवाह के निर्वाह के लिए UL से दूसरी राशि को पढ़ते हैं। इसे हमेशा दाराकारक (चरकारकों में जीवनसाथी का कारक) और नवांश के साथ तौला जाता है — किसी अकेले बिंदु को किसी के विवाह पर फ़ैसला नहीं माना जाता।

चरकारक क्या हैं — आत्मकारक, दाराकारक वग़ैरह?

चरकारक ('चर संकेतक') जैमिनी प्रणाली का ग्रहों को जीवन-भूमिकाएँ सौंपने का तरीक़ा है: ग्रहों को इस क्रम से लगाया जाता है कि हर ग्रह अपनी राशि के भीतर कितने अंश चल चुका है। सबसे ज़्यादा अंश वाला ग्रह आत्मकारक (AK, स्वयं/आत्मा) है; फिर आते हैं अमात्यकारक (AmK, कार्य/करियर), भ्रातृकारक (BK, भाई-बहन/गुरु), मातृकारक (MK, माता), पितृकारक (PiK, पिता), पुत्रकारक (PK, संतान), ज्ञातिकारक (GK, बाधाएँ/प्रतिद्वंद्वी) और दाराकारक (DK, जीवनसाथी) — सबसे कम अंश वाला। यह कैलकुलेटर आपकी कुंडली के आठों कारक आठ-कारक पद्धति में निकालकर सूचीबद्ध करता है।

कारकांश क्या है?

कारकांश वह नवांश (D9) राशि है जिसमें आपका आत्मकारक बैठा है — कुंडली का सबसे ज़्यादा अंश वाला ग्रह लेकर देखें कि नवांश (D9) में वह किस राशि में पड़ता है। जैमिनी पाठ कारकांश को व्यक्ति के जीवन की दिशा और रुझानों का आधार-बिंदु मानता है और उससे गिने भावों को पढ़ता है। यह कैलकुलेटर आपकी कारकांश राशि उसके शास्त्रीय उद्धरण के साथ देता है।

यह कैलकुलेटर शास्त्रीय उद्धरण क्यों दिखाता है?

क्योंकि जैमिनी गणना में परंपरा-दर-परंपरा असली भिन्नताएँ हैं (कारक-पद्धति का चुनाव, आरूढ़ के अपवाद), इसलिए परिणाम का हर कथन अपना स्रोत — ग्रंथ और पंक्ति — उस शास्त्रीय संग्रह से साथ लेकर आता है जिसे इंजन लागू करता है। इससे आप हर मान के पीछे का नियम खुद जाँच सकते हैं — आउटपुट को आँख मूँदकर मानना नहीं पड़ता — और यह भी साफ़ रहता है कि जहाँ परंपराएँ अलग हैं, वहाँ कौन-सी रीति लगाई गई।

कभी-कभी वैदिक जानकारी पाएं

त्योहार की तारीखें, मुहूर्त के सुझाव और कभी-कभी रीडिंग का ऑफर। कोई स्पैम नहीं — जब चाहें अनसब्सक्राइब करें।

स्रोत: जैमिनी सूत्र (उपपद और आरूढ़ पद); बृहत् पाराशर होरा शास्त्र (जैमिनी अध्याय — चरकारक, कारकांश)