फ्री जन्म कुंडली जनरेटर
समीक्षक Pt. Deep Narayan Mishra, Consulting Astrologer · अंतिम समीक्षा 24 May 2026 · हम इसकी गणना कैसे करते हैं
आपकी वैदिक जन्म कुंडली — लग्न, नौ ग्रह, राशि कुंडली, आपकी विंशोत्तरी दशा और मुख्य योग — असली निरयन (लाहिरी) इफ़ेमेरिस इंजन से गणना किए गए। नीचे अपनी जन्म की जानकारी डालें।
कुंडली के बारह भाव — किस भाव में क्या देखा जाता है
कुंडली लग्न से शुरू होकर बारह भावों में बँटी होती है। हर भाव जीवन के एक हिस्से का पता देता है; उस भाव में बैठे ग्रह और उसका स्वामी मिलकर बताते हैं कि वह हिस्सा कैसा रहेगा।
- पहला भाव (लग्न) — खुद, शरीर, स्वभाव और जीवन की दिशा।
- दूसरा भाव — धन, परिवार, वाणी और खाया-पीया।
- तीसरा भाव — हिम्मत, भाई-बहन, मेहनत और छोटी यात्राएँ।
- चौथा भाव — माँ, घर, ज़मीन-जायदाद और मन का सुख।
- पाँचवाँ भाव — संतान, पढ़ाई, बुद्धि और पूर्व-पुण्य।
- छठा भाव — रोग, कर्ज़, शत्रु और रोज़ का संघर्ष।
- सातवाँ भाव — जीवनसाथी, विवाह और साझेदारी।
- आठवाँ भाव — आयु, अचानक घटनाएँ, गुप्त बातें और विरासत।
- नौवाँ भाव — भाग्य, धर्म, गुरु और लंबी यात्राएँ।
- दसवाँ भाव — करियर, कर्म, मान-सम्मान और पिता।
- ग्यारहवाँ भाव — आमदनी, लाभ, इच्छाएँ और मित्र।
- बारहवाँ भाव — खर्च, त्याग, विदेश और मोक्ष।
ऊपर आपकी कुंडली इन्हीं बारह भावों में लग्न, नौ ग्रह और राशियाँ रखकर बनाई जाती है — आपके जन्म के पल और जगह की असली ग्रह-स्थिति से, लाहिरी अयनांश के साथ निरयन गणना में।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
जन्म कुंडली क्या है?
जन्म कुंडली (वैदिक कुंडली) आपके जन्म के समय और जगह के आसमान का एक नक्शा है। इसमें लग्न, बारह भाव और नौ ग्रहों (सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु और केतु) की राशियों और भावों में स्थिति दिखती है।
जन्म कुंडली कैसे बनाएं?
अपनी सटीक जन्म तारीख, जन्म समय (हो सके तो मिनट तक) और जन्म स्थान डालें — यह टूल आपके जन्म के उसी पल और जगह की असली ग्रह-स्थिति से आपकी वैदिक कुंडली लाइव बनाता है: लग्न, बारह भाव, नौ ग्रह, राशि (D1) कुंडली, विंशोत्तरी दशा और मुख्य योग। सब कुछ लाहिरी अयनांश के साथ निरयन तरीके से गणना होता है — कोई तय तालिका नहीं।
सही कुंडली बनवाने के लिए मुझे कौन सी जन्म जानकारी चाहिए?
तीन चीज़ें चाहिए: जन्म की सटीक तारीख, सटीक समय (हो सके तो मिनट तक, क्योंकि लग्न लगभग हर दो घंटे में बदल जाता है), और जन्म की सही जगह। समय सटीक न हो तो लग्न और भावों की शुरुआत सही से तय नहीं हो पाती।
इस कुंडली को बनाने के लिए कौन सा अयनांश इस्तेमाल होता है?
लाहिरी (चित्रपक्ष) अयनांश। यह निरयन राशियों का स्टैंडर्ड सुधार है जिसका इस्तेमाल भारत सरकार के कैलेंडर और ज़्यादातर आधुनिक वैदिक ज्योतिष सॉफ़्टवेयर करते हैं। ग्रहों की स्थिति Swiss Ephemeris से निकाली जाती है और फिर लाहिरी से ठीक की जाती है।
राशि कुंडली और नवमांश में क्या फ़र्क है?
राशि (D1) कुंडली मुख्य जन्म कुंडली है — इसमें लग्न से ग्रह अपनी राशियों और भावों में दिखते हैं। नवमांश (D9) एक नौवें हिस्से की कुंडली है जिसका इस्तेमाल खास तौर पर शादी, धर्म और D1 में देखे गए ग्रहों की ताकत जानने के लिए होता है।
विंशोत्तरी दशा क्या है?
विंशोत्तरी दशा वैदिक ज्योतिष की मुख्य समय-पद्धति है। यह ग्रहों के दौर का 120 साल का चक्र है (केतु 7, शुक्र 20, सूर्य 6, चंद्र 10, मंगल 7, राहु 18, गुरु 16, शनि 19, बुध 17) जिसकी शुरुआत जन्म के समय चंद्रमा के नक्षत्र से तय होती है।
लग्न या एसेंडेंट क्या है?
लग्न जन्म के समय पूर्वी क्षितिज पर उगने वाली राशि है। यह पहले भाव को तय करता है और बाकी सभी भावों की स्थिति व कई भविष्यवाणियां इसी से पढ़ी जाती हैं।
क्या यह वैदिक (निरयन) है या पश्चिमी (सायन) ज्योतिष?
वैदिक, निरयन। ग्रहों की स्थिति को लाहिरी अयनांश से ठीक किया जाता है ताकि राशियां तय तारों से नापी जाएं, सायन विषुव से नहीं। इसीलिए पश्चिमी सूर्य राशि यहां की वैदिक सूर्य राशि से अलग हो सकती है।
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