समीक्षक Dr. L. Nageshwwar Rao, पीएच.डी. (ज्योतिष), परामर्शदाता ज्योतिषी · अंतिम समीक्षा 25 May 2026 · हम इसकी गणना कैसे करते हैं
दिशा शूल वैदिक पंचांग में वार-आधारित अशुभ यात्रा दिशा है। हर वार की एक दिशा होती है जिसे मुहूर्त परंपरा यात्रा शुरू करने के लिए अशुभ मानती है। यह टूल किसी भी शहर के लिए आज की दिशा, उसका शास्त्रीय उद्धरण, और अगर उसी दिशा में जाना हो तो उपाय बताता है।
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अगर आपको उसी दिशा में यात्रा करनी है, तो शास्त्रीय उपाय यह है कि निकलने से पहले घर के अंदर उस अशुभ दिशा में सात कदम चलें — इससे प्रतीकात्मक रूप से शूल टूट जाता है।
दिशा शूल वैदिक पंचांग में वार के अनुसार तय अशुभ यात्रा दिशा है। हर वार के लिए मुहूर्त परंपरा एक दिशा को यात्रा के लिए अशुभ मानती है।
यह वार पर निर्भर करता है: सोमवार — पूर्व, मंगलवार — उत्तर, बुधवार — उत्तर, गुरुवार — दक्षिण, शुक्रवार — पश्चिम, शनिवार — पूर्व, रविवार — पश्चिम। यह टूल आपकी तारीख और शहर के आधार पर आज की दिशा बताता है।
शास्त्रीय उपाय यह है कि घर से निकलने से पहले उसी दिशा में घर के अंदर सात कदम चल लें — इससे शूल टूट जाता है। यह टूल आज की दिशा के साथ उपाय भी बताता है।
हाँ। दिशा शूल वार से तय होता है, जगह से नहीं, इसलिए किसी भी वार के लिए अशुभ दिशा पूरी दुनिया में एक ही रहती है — बस कौन सा वार है, वह आपकी तारीख पर निर्भर करता है।
दिशा के नियम और उपाय शास्त्रीय मुहूर्त ग्रंथों से लिए गए हैं — मुहूर्त चिंतामणि का यात्रा खंड और निर्णय सिंधु।
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