ग्रहों के दौर समझें
अंतर्दशा क्या है? महादशा, अंतर्दशा और प्रत्यंतर दशा का फर्क (Antardasha kya hai)
आखिरी अपडेट · Kundlit संपादकीय टीम
एक नज़र में
- बड़ा दौर
- महादशा
- छोटा दौर
- अंतर्दशा; भुक्ति भी कहते हैं
- हर स्तर में
- नौ ग्रह, उसी क्रम में
- टूल में
- मुख्य, छोटा और प्रत्यंतर दौर
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गणना के लिए खाता नहीं चाहिए। जन्म की तारीख, सही समय और जगह भरें।
अंतर्दशा का आसान मतलब क्या है?
महादशा लंबे समय की पृष्ठभूमि है। अंतर्दशा उसके भीतर छोटा हिस्सा है। बड़े ग्रह का दौर चलते हुए दूसरा ग्रह कुछ समय के लिए जुड़ता है। राहु–शनि का मतलब राहु महादशा में शनि अंतर्दशा है। शनि–राहु इसका उल्टा है। दोनों की लंबाई समान गुणन से मिलती है। बड़ा ग्रह और पढ़ने का आधार अलग है।
किसी छोटे दौर को अगली महादशा न समझें। राहु के अंदर शनि खत्म हो तो बुध अंतर्दशा आती है। मुख्य ग्रह राहु ही रहता है। मुख्य ग्रह तभी बदलता है जब पूरा बड़ा दौर खत्म हो। इस फर्क से नतीजे की सही पंक्ति पढ़ना आसान होता है। बड़ा और छोटा ग्रह अलग-अलग नोट करें।
आधार: बृहत् पाराशर होरा शास्त्र, अध्याय 51, श्लोक 1–3 (महर्षि संस्करण)
अंतर्दशा की लंबाई कैसे निकालते हैं?
पाराशर 51.1 अनुपात देते हैं। राहु के 18 साल को शनि के 19 साल से गुणा करें। 342 को 120 से भाग दें। 2.85 साल मिलते हैं। यानी करीब 2 साल, 10 महीने और 6 दिन।
हमारा कैलकुलेटर दशा का एक साल 365.25 दिन गिनता है। वह ये दिन असली शुरू-तारीख से जोड़ता है। कैलेंडर के महीने बराबर नहीं होते, इसलिए सही तारीख कैलकुलेटर से लें। नीचे की तालिकाएँ पढ़ने के लिए गोल लंबाई देती हैं।
आधार: बृहत् पाराशर होरा शास्त्र, अध्याय 51, श्लोक 1–3 (महर्षि संस्करण)
कौन सी अंतर्दशा सबसे पहले आती है?
पाराशर 51.2 के अनुसार पहली अंतर्दशा बड़े ग्रह की अपनी होती है। शनि की शुरुआत शनि–शनि से है। उसके बाद बुध, केतु, शुक्र, सूर्य, चंद्र, मंगल, राहु और गुरु हैं। केतु के दौर की शुरुआत केतु से होगी। क्रम वही गोल चक्र है। बस शुरू की जगह बदलती है।
जन्म बड़े दौर के बीच में हो तो पहला छोटा दौर निकल गया होगा। कैलकुलेटर जन्म से पहले पूरे दौर की शुरुआत तक पीछे जाता है। फिर जन्म वाला छोटा हिस्सा खोजता है। जन्म पर बची महादशा को नौ नए हिस्सों में बाँटना गलत होगा। इससे हर छोटे दौर की तारीख बदल जाएगी।
आधार: बृहत् पाराशर होरा शास्त्र, अध्याय 51, श्लोक 1–3 (महर्षि संस्करण)
प्रत्यंतर, सूक्ष्म और प्राण दशा क्या हैं?
प्रत्यंतर अंतर्दशा के अंदर और छोटा दौर है। सूक्ष्म उसके भीतर है। प्राण फिर उसके भीतर है। हर बार समय को छोटे ग्रह के साल ÷ 120 के अनुपात से बाँटें। पहला ग्रह उस स्तर के बड़े ग्रह से शुरू होगा। आखिरी हिस्सा उसी बड़े दौर के अंत पर खत्म होगा। पाराशर अध्याय 61–63 प्रत्यंतर, सूक्ष्म और प्राण दशा के फल देते हैं।
फ्री कैलकुलेटर ऊपर के तीन स्तर दिखाता है: महादशा, अंतर्दशा और प्रत्यंतर। बहुत छोटा दौर अकेले किसी तय दिन की घटना का वादा नहीं करता। पहले जन्म समय का भरोसा जाँचें।
आधार: बृहत् पाराशर होरा शास्त्र, अध्याय 51, श्लोक 1–3 (महर्षि संस्करण); बृहत् पाराशर होरा शास्त्र, अध्याय 61–63 (महर्षि संस्करण)
महादशा ज्यादा जरूरी है या अंतर्दशा?
दोनों की भूमिका अलग है। बड़ा ग्रह पृष्ठभूमि रखता है। छोटा ग्रह उसमें सक्रिय जोड़ी बनाता है। फलदीपिका 21.84 व्यक्ति के जीवन की स्थिति के साथ फल पढ़ने को कहती है। वह पद, कुल, काम और रूप को गिनाती है। यही नियम छोटे दौरों पर भी लागू है। विद्यार्थी और काम छोड़ चुके व्यक्ति अलग हालात रखते हैं। एक ही नौकरी-वाक्य सही नहीं होगा।
सिर्फ छोटे ग्रह का अच्छा नाम बड़ा ग्रह मिटा नहीं देता। सिर्फ बड़े ग्रह का कठिन नाम हर छोटा दौर खराब नहीं बनाता। दोनों की जगह और संबंध साथ पढ़ें। टूल तारीखें देता है। वह जीवन की पूरी स्थिति अपने आप नहीं जानता। इसलिए तारीख की तालिका और व्यक्तिगत फल को अलग पहचानें।
आधार: फलदीपिका, अध्याय 21 (अंतर्दशा फल; जीवन की स्थिति वाला श्लोक 84)
सभी नौ महादशाओं की पूरी अंतर्दशा तालिका क्या है?
ये पूरे बड़े दौरों की तालिकाएँ हैं। जन्म का बचा समय छोटा हो सकता है। महीने एक दशमलव तक गोल हैं। सही तारीख टूल से लें।
| छोटा दौर | लंबाई |
|---|---|
| केतु | 4.9 महीने |
| शुक्र | 1 साल 2 महीने |
| सूर्य | 4.2 महीने |
| चंद्र | 7 महीने |
| मंगल | 4.9 महीने |
| राहु | 1 साल 0.6 महीने |
| गुरु | 11.2 महीने |
| शनि | 1 साल 1.3 महीने |
| बुध | 11.9 महीने |
| छोटा दौर | लंबाई |
|---|---|
| शुक्र | 3 साल 4 महीने |
| सूर्य | 1 साल |
| चंद्र | 1 साल 8 महीने |
| मंगल | 1 साल 2 महीने |
| राहु | 3 साल |
| गुरु | 2 साल 8 महीने |
| शनि | 3 साल 2 महीने |
| बुध | 2 साल 10 महीने |
| केतु | 1 साल 2 महीने |
| छोटा दौर | लंबाई |
|---|---|
| सूर्य | 3.6 महीने |
| चंद्र | 6 महीने |
| मंगल | 4.2 महीने |
| राहु | 10.8 महीने |
| गुरु | 9.6 महीने |
| शनि | 11.4 महीने |
| बुध | 10.2 महीने |
| केतु | 4.2 महीने |
| शुक्र | 1 साल |
| छोटा दौर | लंबाई |
|---|---|
| चंद्र | 10 महीने |
| मंगल | 7 महीने |
| राहु | 1 साल 6 महीने |
| गुरु | 1 साल 4 महीने |
| शनि | 1 साल 7 महीने |
| बुध | 1 साल 5 महीने |
| केतु | 7 महीने |
| शुक्र | 1 साल 8 महीने |
| सूर्य | 6 महीने |
| छोटा दौर | लंबाई |
|---|---|
| मंगल | 4.9 महीने |
| राहु | 1 साल 0.6 महीने |
| गुरु | 11.2 महीने |
| शनि | 1 साल 1.3 महीने |
| बुध | 11.9 महीने |
| केतु | 4.9 महीने |
| शुक्र | 1 साल 2 महीने |
| सूर्य | 4.2 महीने |
| चंद्र | 7 महीने |
| छोटा दौर | लंबाई |
|---|---|
| राहु | 2 साल 8.4 महीने |
| गुरु | 2 साल 4.8 महीने |
| शनि | 2 साल 10.2 महीने |
| बुध | 2 साल 6.6 महीने |
| केतु | 1 साल 0.6 महीने |
| शुक्र | 3 साल |
| सूर्य | 10.8 महीने |
| चंद्र | 1 साल 6 महीने |
| मंगल | 1 साल 0.6 महीने |
| छोटा दौर | लंबाई |
|---|---|
| गुरु | 2 साल 1.6 महीने |
| शनि | 2 साल 6.4 महीने |
| बुध | 2 साल 3.2 महीने |
| केतु | 11.2 महीने |
| शुक्र | 2 साल 8 महीने |
| सूर्य | 9.6 महीने |
| चंद्र | 1 साल 4 महीने |
| मंगल | 11.2 महीने |
| राहु | 2 साल 4.8 महीने |
| छोटा दौर | लंबाई |
|---|---|
| शनि | 3 साल 0.1 महीने |
| बुध | 2 साल 8.3 महीने |
| केतु | 1 साल 1.3 महीने |
| शुक्र | 3 साल 2 महीने |
| सूर्य | 11.4 महीने |
| चंद्र | 1 साल 7 महीने |
| मंगल | 1 साल 1.3 महीने |
| राहु | 2 साल 10.2 महीने |
| गुरु | 2 साल 6.4 महीने |
| छोटा दौर | लंबाई |
|---|---|
| बुध | 2 साल 4.9 महीने |
| केतु | 11.9 महीने |
| शुक्र | 2 साल 10 महीने |
| सूर्य | 10.2 महीने |
| चंद्र | 1 साल 5 महीने |
| मंगल | 11.9 महीने |
| राहु | 2 साल 6.6 महीने |
| गुरु | 2 साल 3.2 महीने |
| शनि | 2 साल 8.3 महीने |
आधार: बृहत् पाराशर होरा शास्त्र, अध्याय 51, श्लोक 1–3 (महर्षि संस्करण)
भुक्ति क्या होती है?
भुक्ति अंतर्दशा का दूसरा नाम है। कुछ किताबें छोटे दौर को इसी नाम से लिखती हैं। यह दसवाँ ग्रह या अलग लंबाई का नया स्तर नहीं है। रिपोर्ट की जोड़ी में पहला बड़ा ग्रह और दूसरा भुक्ति का ग्रह पढ़ें। नाम बदलने से समय का अनुपात नहीं बदलता।
आधार: फलदीपिका, अध्याय 21 (अंतर्दशा फल; जीवन की स्थिति वाला श्लोक 84)
मिसाल की कुंडली — किसी असली व्यक्ति की नहीं
शनि के छोटे दौर मिलकर 19 साल कैसे बनते हैं?
शनि–शनि = 19 × 19 ÷ 120 = 3.008 साल। यानी करीब 3 साल और 3 दिन। शनि–बुध = 19 × 17 ÷ 120 = 2.692 साल। यानी करीब 2 साल, 8 महीने और 9 दिन। दोनों मिलकर करीब 5 साल 8 महीने होते हैं। अगली पंक्ति केतु की है।
नौ छोटे ग्रहों के साल जोड़ने पर 120 मिलते हैं। इसलिए नौ लंबाइयों का योग 19 × 120 ÷ 120 = 19 साल है। गोल किए महीने जोड़ने पर छोटा फर्क दिख सकता है। हमारा कैलकुलेटर आखिरी अंतर्दशा ठीक मुख्य दौर की अंत-तारीख पर खत्म करता है। इसलिए गोलाई कभी बड़े दौर से बाहर नहीं जाती।
| छोटा दौर | लंबाई | गणना |
|---|---|---|
| शनि | 3 साल 0.1 महीने | 19 × 19 ÷ 120 |
| बुध | 2 साल 8.3 महीने | 19 × 17 ÷ 120 |
| केतु | 1 साल 1.3 महीने | 19 × 7 ÷ 120 |
| शुक्र | 3 साल 2 महीने | 19 × 20 ÷ 120 |
| सूर्य | 11.4 महीने | 19 × 6 ÷ 120 |
| चंद्र | 1 साल 7 महीने | 19 × 10 ÷ 120 |
| मंगल | 1 साल 1.3 महीने | 19 × 7 ÷ 120 |
| राहु | 2 साल 10.2 महीने | 19 × 18 ÷ 120 |
| गुरु | 2 साल 6.4 महीने | 19 × 16 ÷ 120 |
गलत जन्म समय छोटे दौरों की तारीख बदलता है। समय-सूची पक्का व्यक्तिगत फल नहीं है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
अंतर्दशा क्या है?
महादशा के अंदर छोटा ग्रह-दौर है। प्रत्येक पूरे बड़े दौर में नौ अंतर्दशाएँ होती हैं।
राहु–शनि कितने समय की है?
18 × 19 ÷ 120 = 2.85 साल। यानी करीब 2 साल, 10 महीने और 6 दिन।
पहली अंतर्दशा कौन सी है?
पूरा बड़ा दौर अपने ही ग्रह की अंतर्दशा से शुरू होता है। जन्म बीच में हो तो वह निकल चुकी होगी।
भुक्ति और अंतर्दशा अलग हैं?
नहीं। भुक्ति अंतर्दशा का दूसरा नाम है।
क्या टूल हर स्तर दिखाता है?
नहीं। यह ऊपर के तीन स्तर दिखाता है: महादशा, अंतर्दशा और प्रत्यंतर।
महीने गोल करने से योग क्यों बदलता है?
तालिका आसान पढ़ने के लिए गोल औसत महीने देती है। असली अनुपात बिना गोल किए पूरे बड़े दौर के बराबर है।
स्रोत
पाराशर के अध्याय महर्षि संस्करण के अनुसार हैं। दूसरे संस्करणों में नंबर बदल सकते हैं।
- बृहत् पाराशर होरा शास्त्र, अध्याय 51, श्लोक 1–3 (महर्षि संस्करण)
- बृहत् पाराशर होरा शास्त्र, अध्याय 61–63 (महर्षि संस्करण)
- फलदीपिका, अध्याय 21 (अंतर्दशा फल; जीवन की स्थिति वाला श्लोक 84)
दशाब्दाः स्वस्वमानघ्नाः सर्वायुर्योगभाजिताः / पृथगन्तर्दशा एवं प्रत्यन्तरदशादिकाः