मंगल के नियम समझें
मांगलिक दोष कब खत्म होता है? मांगलिक दोष के परिहार और उपाय (Manglik dosha cancellation)
आखिरी अपडेट · Kundlit संपादकीय टीम
एक नज़र में
- घर
- 1, 2, 4, 7, 8, 12
- तीन आधार
- लग्न, चंद्र, शुक्र
- परिहार का असर
- दोष हल्का; मांगलिक बना रहता है
- उम्र 28
- उम्र से दोष खत्म नहीं होता
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मांगलिक दोष ठीक-ठीक क्या है?
मांगलिक दोष शादी से जुड़ी मंगल की जगह की जाँच है। मंगल पहले, दूसरे, चौथे, सातवें, आठवें या बारहवें घर में हो तो यह लगता है। ये घर तीन बार गिने जाते हैं। लग्न से, चंद्र से और शुक्र से। हर गिनती एक अलग जाँच है। नतीजे में तीनों दिखती हैं, ताकि पता चले कौन सी लगी।
यह चिंता पुरानी है। सारावली 34.46 कहती है कि सातवें घर के पाप ग्रह शादी को नुकसान देते हैं। वह सातवाँ घर लग्न या चंद्र में से जो बली हो, उससे गिनती है। सारावली 34.50 कहती है कि सातवें मंगल वाला पुरुष पत्नी से अक्सर दूर रहता है। फलदीपिका 10.3 सातवें घर में मीन के मंगल को जीवनसाथी के लिए कठिन बताती है। उसी श्लोक में एक अच्छा योग भी है। कर्क में मंगल और शनि साथ हों तो पत्नी सती और सुंदर होती है।
आज की छह घरों वाली सूची इन श्लोकों से बड़ी है। पूरी सूची के लिए यहाँ कोई शास्त्रीय श्लोक नहीं दिया गया है। आज परिवार यही नियम मानते हैं, और हमारा कैलकुलेटर इसी को लगाता है।
अपनी जाँच तीन पंक्तियों में लिखें। पहली पंक्ति में लग्न से मंगल का घर। दूसरी में चंद्र से गिना घर। तीसरी में शुक्र से गिना घर। हर पंक्ति को छह घरों की सूची से मिलाएँ। नीचे अलग पंक्ति में परिहार लिखें। इससे पता चलता है कि हल्का नतीजा एक जाँच से आया या परिहार से।
आधार: सारावली, अध्याय 34, श्लोक 46–51; फलदीपिका, अध्याय 10, श्लोक 3
कौन से परिहार मांगलिक दोष को हल्का करते हैं?
हमारा कैलकुलेटर पाँच परिहार देखता है। पहला: मंगल अपनी राशि मेष या वृश्चिक में हो, या उच्च राशि मकर में। दूसरा: गुरु उसी राशि में हो जिसमें मंगल है। तीसरा: गुरु की दृष्टि मंगल पर पड़े। दृष्टि यानी किसी ग्रह का दूसरी राशि पर असर। गुरु अपने से पाँचवीं, सातवीं और नौवीं राशि पर दृष्टि डालता है। चौथा: चंद्र उसी राशि में हो जिसमें मंगल है। पाँचवाँ: मंगल दूसरे घर में हो और वह घर मिथुन या कन्या हो।
दूसरे घर वाला परिहार सिर्फ लग्न से गिना जाता है। गुरु वाले परिहार में गुरु का असर मंगल पर पड़ना जरूरी है। कुंडली में कहीं और मजबूत गुरु होना काफी नहीं। शुक्र, शनि या मित्र राशि वाले शॉर्टकट भी नहीं लगाए जाते।
हमारा कैलकुलेटर इन्हें परंपरा के परिहार मानता है। इनमें से कोई एक भी हो तो तीव्रता हल्की हो जाती है। पर मांगलिक का नतीजा नहीं हटता। गुरु वाले परिहार बृहत् पाराशर होरा शास्त्र 80.47 में हैं। बाकी परिहार परंपरा से आते हैं।
आधार: बृहत् पाराशर होरा शास्त्र, अध्याय 80, श्लोक 47–49 (महर्षि संस्करण)
दोनों साथी मांगलिक हों तो क्या दोष मिटता है?
बहुत से परिवार दोनों साथी मांगलिक हों तो रिश्ता मान लेते हैं। यह जोड़ी का नियम है। एक कुंडली से इसकी जाँच नहीं हो सकती। इस पेज का कैलकुलेटर एक ही कुंडली पढ़ता है। जोड़ी के लिए दोनों की सही जन्म जानकारी और कुंडली मिलान चाहिए।
बृहत् पाराशर होरा शास्त्र 80.48-49 यह नियम देता है। पुरुष की कुंडली में ऐसा मंगल पत्नी को नुकसान देता है। ऐसे पुरुष की शादी ऐसी स्त्री से हो, तो नुकसान मिट जाता है।
दो मांगलिक लोगों की शादी पर कोई रोक नहीं है। मिलान इस नियम के साथ दोनों कुंडलियों की बाकी बातें भी पढ़ता है। सिर्फ दो तीव्रता-शब्द मिलाने से बहुत कम पता चलता है। कुंडली मिलान से दोनों कुंडलियाँ ठीक से मिलाएँ।
आधार: बृहत् पाराशर होरा शास्त्र, अध्याय 80, श्लोक 47–49 (महर्षि संस्करण)
दोनों की कुंडली मिलाएँक्या मांगलिक दोष 28 साल की उम्र पर खत्म होता है?
नहीं। 28 साल वाली बात एक लोक-मान्यता है। यहाँ दिए शास्त्रीय ग्रंथ इसका समर्थन नहीं करते। जन्म के समय मंगल जहाँ था, वह कभी नहीं बदलता। इसलिए 18, 28 या 48 की उम्र में मांगलिक नतीजा वही रहता है।
उम्र के साथ अभी चल रहा ग्रह-दौर जरूर बदलता है। वह अलग सवाल है। उसका जवाब दशा कैलकुलेटर देता है। मंगल के सात साल के दौर का अलग पेज भी है।
किस घर की जगह सबसे मजबूत है?
इस पेज के शास्त्रीय श्लोक सातवें घर के मंगल की बात करते हैं। सारावली 34.50 और फलदीपिका 10.3 दोनों सातवाँ घर बताते हैं। बहुत से परिवार आठवें मंगल को भी गंभीर मानते हैं।
हमारा कैलकुलेटर किसी घर को दूसरे से ज्यादा वजन नहीं देता। तीव्रता इस पर टिकी है कि तीन में से कितनी जाँचें लगीं। कोई जाँच न लगे तो दोष नहीं। एक लगे तो हल्का। बिना परिहार दो लगें तो मध्यम। बिना परिहार तीनों लगें तो अधिक। कोई भी परिहार हो तो नतीजा हल्का हो जाता है।
इसलिए सातवें घर का मंगल भी हल्का दिख सकता है। सिर्फ तीव्रता का शब्द नहीं, कौन सा घर लगा यह भी पढ़ें।
आधार: सारावली, अध्याय 34, श्लोक 46–51; फलदीपिका, अध्याय 10, श्लोक 3
परंपरा में कौन से उपाय किए जाते हैं?
कैलकुलेटर मंगलवार के आम उपाय बताता है। हनुमान चालीसा, मसूर दाल का दान और पीपल को जल। मध्यम और अधिक नतीजे में योग्य पंडित से मंगल शांति पूजा भी सुझाई जाती है। ये परंपरा के उपाय हैं, यहाँ दिए ग्रंथों के श्लोक नहीं।
पहले अपना नतीजा और उसके परिहार पढ़ें। फिर भी चिंता हो तो दोनों कुंडलियों का सही मिलान कराएँ। डर से कोई उपाय न खरीदें। कोई भी पूजा जन्म के मंगल की जगह नहीं बदलती।
मिसाल की कुंडली — किसी असली व्यक्ति की नहीं
मेष में मंगल और सातवें में कर्क का मंगल कैसे अलग हैं?
मिसाल A: मंगल पहले घर में मेष राशि में है। पहले घर की जाँच लगती है। मेष मंगल की अपनी राशि है, इसलिए परिहार भी लगता है। नतीजा: मांगलिक, हल्का। दोष पूरी तरह खत्म नहीं हुआ।
मिसाल B: मंगल सातवें घर में कर्क राशि में है। कर्क मंगल की अपनी या उच्च राशि नहीं है। सातवें घर की जाँच लगती है, अपनी-राशि वाला परिहार नहीं। आखिरी तीव्रता चंद्र, शुक्र और गुरु की जगह पर भी टिकी है। उन्हें देखने के लिए ऊपर का कैलकुलेटर चलाएँ।
मंगल की एक जगह से शादी का नतीजा तय नहीं होता। दोनों कुंडलियाँ सही जानकारी से जाँचें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
कौन से घर गिने जाते हैं?
पहला, दूसरा, चौथा, सातवाँ, आठवाँ और बारहवाँ। गिनती लग्न, चंद्र और शुक्र से होती है।
क्या मेष का मंगल दोष मिटा देता है?
नहीं। अपनी राशि का मंगल दोष को हल्का करता है। कुंडली मांगलिक ही रहती है।
क्या गुरु का असर देखा जाता है?
हाँ। गुरु मंगल की राशि में हो तो गिना जाता है। गुरु की दृष्टि मंगल पर हो, तब भी।
क्या दोनों मांगलिक होने की जाँच यहाँ होती है?
नहीं। यह टूल एक कुंडली पढ़ता है। दोनों कुंडलियों के लिए कुंडली मिलान करें।
क्या 28 साल पर दोष खत्म होता है?
नहीं। यह लोक-मान्यता है। यहाँ दिए शास्त्रीय ग्रंथ इसका समर्थन नहीं करते।
क्या हर परिहार का श्लोक है?
सबका नहीं। गुरु वाले परिहार बृहत् पाराशर होरा शास्त्र 80.47 में हैं। बाकी परिहार परंपरा से आते हैं।
स्रोत
पाराशर के अध्याय महर्षि संस्करण के अनुसार हैं। दूसरे संस्करणों में नंबर बदल सकते हैं।
- सारावली, अध्याय 34, श्लोक 46–51
- फलदीपिका, अध्याय 10, श्लोक 3
- बृहत् पाराशर होरा शास्त्र, अध्याय 80, श्लोक 47–49 (महर्षि संस्करण)