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एकादशी शब्द का संस्कृत में मतलब है ग्यारह — यह हर पक्ष की ग्यारहवीं चांद्र तिथि का नाम है। पद्म पुराण और विष्णु पुराण में एकादशी का व्रत रखने को मुख्य वैष्णव अनुष्ठान बताया गया है: भक्त अनाज नहीं खाते, प्रार्थना करते हैं, और अगले दिन द्वादशी को तय समय पर व्रत तोड़ते हैं (पारण)। साल की सबसे बड़ी एकादशी हैं निर्जला (ज्येष्ठ में बिना पानी का व्रत), देवशयनी (जब विष्णु योगनिद्रा में जाते हैं), और प्रबोधिनी (जब वे कार्तिक में जागते हैं)।
एकादशी हर चांद्र मास में शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष — दोनों की 11वीं तिथि को आती है, यानी साल में 24 बार। हर एकादशी का अपना नाम, कथा और तय व्रत होता है। तिथियाँ पंचांग के साथ बदलती हैं और स्थानीय सूर्योदय की वजह से शहर अनुसार थोड़ी अलग हो सकती हैं।