ग्रहण कैलेंडर
सूर्य ग्रहण अमावस्या को तब होता है जब चाँद पृथ्वी और सूर्य के ठीक बीच से गुजरता है। चंद्र ग्रहण पूर्णिमा को तब होता है जब पृथ्वी की छाया चाँद पर पड़ती है। वैदिक परंपरा में ग्रहण के दौरान खास अनुष्ठान और बाद में शुद्धि-स्नान का विधान है। दृश्यता और समय शहर अनुसार बदलते हैं।
शहर अनुसार ग्रहण दृश्यता — 2026
- मुंबईMumbai
- दिल्लीDelhi
- बेंगलुरुBengaluru
- हैदराबादHyderabad
- अहमदाबादAhmedabad
- चेन्नईChennai
- कोलकाताKolkata
- पुणेPune
- जयपुरJaipur
- लखनऊLucknow
- कानपुरKanpur
- नागपुरNagpur
- इंदौरIndore
- भोपालBhopal
- पटनाPatna
- वडोदराVadodara
वैदिक कैलेंडर में ग्रहण
सूर्य सिद्धांत और ब्रह्मस्फुट सिद्धांत में ग्रहण की गणना विस्तार से बताई गई है — छाया की गणना, अवधि, और राहु व केतु को कारण माना गया है। शास्त्रीय परंपरा के अनुसार: ग्रहण शुरू होने पर व्रत शुरू करना (सूर्य ग्रहण में 9 घड़ी पहले), भोजन और नींद से बचना, पूर्ण ग्रहण के समय जाप और तर्पण करना, और मोक्ष (ग्रहण के अंत) के तुरंत बाद स्नान करना। यह इंजन स्विस इफ़ेमेरिस से ग्रहण का आंकड़ा निकालता है और दिए गए शहर से दृश्यता तय करता है।
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